🔊 All my Veteran brothers.. I m new here. Giving 1st time ssc cgl. No idea how to prepare. Which book for english,maths n resoning. Which video lectures and websites are useful. How to read and memorize thousand of english words😩. I m starting from zero. I am requesting all of you to give your valuable suggestions. Regarding same. 💡💡💡
Pati:(Phone par Patni se): Tum bahut pyari ho! Patni: Thanks! Pati: Tum bilkul Rajkumari jaisi ho! Patni: Thank you so much dear! aur batayo kya kar rahe ho? Pati: Mazaak!
5000 Crore ke turn over karne ke bad Baba Ji se ek gujarish hai ki ek Patanjali Girlfriend bhi launch kar do jo Pizza, Burger ke bajay Ayurvedic churan khati ho! sasti padegi hum jaise berozgaro ke liye!
पहले - हम लोग के जमाने में - हमारे यू.पी में - घर घर 'सत्यनारायण भगवान्' का पूजा बहुत होता है - किसी किसी के यहाँ 'उठौना टाईप' - हर पूर्णिमा को ! सभी हित - कुटुंब / यार दोस्त आते थे ! पूजा के बाद 'आरती' होती थी - रंजूलाल टाईप को आरती दिखाने का जिम्मा दिया जाता था - भले पूजा किसी के भी घर हो रहा हो - 'आरती' तो रंजूलाल ही दिखायेंगे - सभी लोग को ..हा हा हा हा ..लाल टी और जींस में ...उस दौरान तीन तरह के लोग मिलते थे - एक जो पहले से अपने मुठ्ठी में - 'रेज़की / सिक्का' लेकर बैठे हैं -आरती आया नहीं की झट से सिक्का डाले - बात ख़त्म ! दुसरे थे - आरती आते ही - अपना मोटा पर्स से दस / बीस का नोट निकाले - हम भी उनको ऊपर से निचे दो बार देखे - वो दस / बीस का नोट देने वाले - जिसके यहाँ पूजा हो रहा है - उनके साथ के अपने सम्बन्ध को दर्शाते थे ! "एक और आईटम लोग होते थे - चार बार आरती पर हाथ फेरा - चारों बार अपना मुह / हाथ / माथापवित्र किया - पर ना तो सिक्का दिया और ना ही रुपैया " - हा हा हा हा हा ..आरती के बाद पूछ दिए ...झट से जबाब ..अभी तीन जगह से 'सत्यनारायण भगवान्' का पूजा झेल के आ रहे हैं ..कहाँ कहाँ आरती में पैसा दें ...हा हा हा.वैसा ही फेसबुक है - यहाँ भी तीन तरह के लोग हैं - एक जो - आप कुछ लिखे नहीं की झट से उनका सिक्का ( लाईक ) आ गया - दुसरे जो - आप कुछ भी लिखें - रोमांस /राजनीति / हास्य / व्यंग्य / मेमॉयर - उनका एक कमेन्ट ( दस / बीस वाला नोट ) आएगा ही आएगा - और एक होते हैं - जो चार बार पढेंगे लेकिन ना तो सिक्का और ना ही नोट ..हा हा हा हा ..अब रंजुलाल रोज सुबह शाम कुछ छाप देंगे ...कितना लाईक करें ...पढ़ लिए ..यही कम है ..क्या
बचपन में जब दोस्त के घर जाते थे और बाहर खड़े होकर उसे आवाज़ लगाते थे तो सबसे पहले उसका बाप निकल आता था और वो ऐसे घूरता था जैसे हम तालिबान से ताल्लुक रखते हो ।