kisi ka pspcl ldc ka exam tha aaj?
🙅🙆🙇🙆🙅🙆🙇🙌...... Its my Uber-doober lucky dance for all of us.... Best of luck friends for tomorrow
Aaj aayega kya........Is there any hope....
SSC will select
- greater no of candidates
- exact no of candidates
0 voters
How many of u think that ssc will delay the result ?
Guys , do you think that there are sufficient candidates wanting DEO who have gone pass 50 wpm else if not then they will surely ruin ldc pa/sa seats as per me :( what do you all think
Eagerly waiting for chsl.. i have selected for rrb OA. The dv date of rrb OA and cgl tier 2 exam date are same 21st feb. If cleared chsl giveup rrb oa and go for tier. Else need to give up tier2 and go for DV. Fingera crossed.
Feeling hours of constant nausea 😲 feeling is mutual ?? What say guysss 😂😂
24 hours to go
---- The current mood of the aspirants be like ----
Bas ek haan ke intezaar mein raat yunhi guzar jayegi ...
Ab toh bas uljhan hai saath mere, neend kahan aayegi ...
Subah ki kiran na jaane kaunsa sandesh layegi ...
Rim jhim si gungunayegi ya pyas adhoori reh jayegi ...
Courtesy : Guzarish from Ghajini
Kal nh aayga result
Even if a candidate qualifies both TT and DEST, he may have opted for a non-DEO post in his preference order. This can happen irrespective of whatever error percentage SSC fixes in DEST. How grave can this be a cause of concern for those who had only chances for non-DEO posts?
No result today... Good night.
You can't say what the outcome of a competition is going to be,
so now I am ready to accept any result that comes my way,
If I have given my best shot
Good Night Dudes
good night people, aane wali subha aapke liye khushi le aaye
21 hours to go...😲😲😲😲😲😲
16 is a very lucky date for me hope it became more luckier.. 😊
Bas aaj ki raat.
*आदतें औकात का पता बता देती हैं...* एक राजा के दरबार मे एक अजनबी इंसान नौकरी मांगने के लिए आया। उससे उसकी क़ाबलियत पूछी गई, तो वो बोला, "मैं आदमी हो चाहे जानवर, शक्ल देख कर उसके बारे में बता सकता हूँ। राजा ने उसे अपने खास "घोड़ों के अस्तबल का इंचार्ज" बना दिया। चंद दिनों बाद राजा ने उससे अपने सब से महंगे और मनपसन्द घोड़े के बारे में पूछा, उसने कहा, "नस्ली नही हैं ।" राजा को हैरानी हुई, उसने जंगल से घोड़े वाले को बुला कर पूछा.. उसने बताया, घोड़ा नस्ली तो हैं, पर इसकी पैदायश पर इसकी मां मर गई थी, ये एक गाय का दूध पी कर उसके साथ पला है। राजा ने अपने नौकर को बुलाया और पूछा तुम को कैसे पता चला के घोड़ा नस्ली नहीं हैं ?" "उसने कहा "जब ये घास खाता है तो गायों की तरह सर नीचे करके, जबकि नस्ली घोड़ा घास मुह में लेकर सर उठा लेता हैं।😊 राजा उसकी काबलियत से बहुत खुश हुआ, उसने नौकर के घर अनाज ,घी, मुर्गे, और अंडे बतौर इनाम भिजवा दिए। और उसे रानी के महल में तैनात कर दिया। चंद दिनो बाद , राजा ने उस से रानी के बारे में राय मांगी, उसने कहा, "तौर तरीके तो रानी जैसे हैं लेकिन पैदाइशी नहीं हैं।” राजा के पैरों तले जमीन निकल गई, उसने अपनी सास को बुलाया, मामला उसको बताया, सास ने कहा "हक़ीक़त ये हैं, कि आपके पिताजी ने मेरे पति से हमारी बेटी की पैदाइश पर ही रिश्ता मांग लिया था, लेकिन हमारी बेटी 6 माह में ही मर गई थी, लिहाज़ा हम ने आपके रजवाड़े से करीबी रखने के लिए किसी और की बच्ची को अपनी बेटी बना लिया।" राजा ने फिर अपने नौकर से पूछा "तुम को कैसे पता चला ?" ""उसने कहा, " रानी साहिबा का नौकरो के साथ सुलूक गंवारों से भी बुरा हैं । एक खानदानी इंसान का दूसरों से व्यवहार करने का एक तरीका होता हैं, जो रानी साहिबा में बिल्कुल नही। राजा फिर उसकी पारखी नज़रों से खुश हुआ और बहुत से अनाज , भेड़ बकरियां बतौर इनाम दीं साथ ही उसे अपने दरबार मे तैनात कर दिया। कुछ वक्त गुज़रा, राजा ने फिर नौकर को बुलाया,और अपने बारे में पूछा। नौकर ने कहा "जान की सलामती हो तो कहूँ।” राजा ने वादा किया। उसने कहा, "न तो आप राजा के बेटे हो और न ही आपका चलन राजाओं वाला है।" राजा को बहुत गुस्सा आया, मगर जान की सलामती का वचन दे चुका था, राजा सीधा अपनी मां के महल पहुंचा। मां ने कहा, "ये सच है, तुम एक चरवाहे के बेटे हो, हमारी औलाद नहीं थी तो तुम्हे गोद लेकर हम ने पाला।” राजा ने नौकर को बुलाया और पूछा , बता, "तुझे कैसे पता चला ?” उसने कहा " जब राजा किसी को "इनाम दिया करते हैं, तो हीरे मोती और जवाहरात की शक्ल में देते हैं....लेकिन आप भेड़, बकरियां, खाने पीने की चीजें दिया करते हैं...ये रवैया किसी राजाओं का नही, किसी चरवाहे के बेटे का ही हो सकता है।" किसी इंसान के पास कितनी धन दौलत, सुख समृद्धि, रुतबा, इल्म, बाहुबल हैं ये सब बाहरी दिखावा हैं । इंसान की असलियत की पहचानउसके व्यवहार और उसकी नियत से होती हैं... इसीलिए “चाय” बेचने वाले की सोच, “पकौड़े” बेचने से ऊपर नही उठ सकती। हैसियत बदल जाती है,पर सोच नही।
Aaz kon kon nhi soyega??